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करोड़ों का गबन कर आरोपी फरार, केशियर की जमानत निरस्त

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होशंगाबाद/इटारसी,राहुल अग्रवाल। इटारसी शहर के पास तिखड़ स्थित आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर कुलदीप यदुवंशी जो लगभग 3 करोड़ 8 लाख 20 हज़ार का गबन कर रफूचक्कर हो गया अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। साथ ही सह आरोपी बैंक केशियर की जमानत न्यायालय ने निरस्त कर दी है। फरियादी किशोर शर्मा ने थाना पथरौटा, इटारसी में लिखित आवेदन दिया, जिसके अनुसार उसने आईसीआईसीआई बैंक की तीखड़ शाखा में KCC(किसान क्रेडिट कार्ड) के अंर्तगत खाता खोला गया था और इसी साल 03 जून को एनओसी प्राप्त कर उक्त खाते को उसने बन्द करवा दिया था।

20 जून को उक्त बैंक की मुख्य शाखा इंदौर से उसके फोन पर जानकारी दी गयी कि 17 जून को उसके उक्त खाते के शाखा प्रबंधक कुलदीप सिंह यदुवंशी और कैशियर सूरज सिंह राजपूत द्वारा फर्जी हस्ताक्षर करके केसीसी के अंतर्गत 8 लाख 55 हजार रू. का लोन लिया गया है। फरियादी ने लोन के लिए कोई आवेदन नहीं किया था और ना ही उक्त राशि का लोन उसने ने प्राप्त किया था। उक्त बैंक के अन्य खातेदारों के विभिन्न खातों से भी बैंक मैनेजर द्वारा फर्जी हस्ताक्षर करके राशि निकाली गयी है।

बैंक मैनेजर द्वारा 1,67,31,260 रू. की राशि का गबन करने की जानकारी प्राप्त हुई। जांच के दौरान बैंक द्वारा जानकारी दी गयी कि अभी तक कुल 3 करोड़ 8 लाख 20 हज़ार का गबन हुआ है। पुलिस द्वारा धारा 409 और 420 भादवि के अंतर्गत बैंक मैनेजर कुलदीप सिंह यदुवंशी आदि के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। कुलदीप सिंह के फरार होने के कारण पुलिस द्वारा अन्य आरोपी सूरज राजपूत के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। आरोपी सूरजसिंह द्वारा माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायालय इटारसी (न्यायाधीश सुश्री सविता जड़िया) के समक्ष ज़मानत याचिका लगायी गयी थी। माननीय न्यायालय द्वारा बैंक के इंटरनल ऑडिट टीम द्वारा शाखा के समस्त दस्तावेजो और रिकॉर्डो की जांच में खातेदारों के खाते में की गड़बड़ियों को गंभीर मानतें हुए व्यक्त किया कि फर्जी तरीके से खातेदारों के खाते से अभियुक्त द्वारा फर्जी तरीके से धन आहरण करने के कारण बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ और खातों में जमा लोकधन को भी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस द्वारा प्रकरण को विवेचना में लिया गया है। प्रकरण में शासन की ओर से अति. जिला अभियोजन अधिकारी एचएस यादव, इटारसी द्वारा आरोपी की ज़मानत का मौखिक विरोध किया एवं माननीय न्यायालय ने शासन द्वारा प्रस्तुत तर्कों से सहमत होकर ज़मानत आवेदन निरस्त किया गया।

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