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Bhopal News: जमाने के हिसाब से पुतली कला में बदलाव की दरकार

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Publish Date: | Sun, 29 Nov 2020 10:55 PM (IST)

जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली प्रदर्शन एवं व्याख्यान

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित गमक श्रृंखला अंतर्गत रविवार को आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा आयोजित देश में प्रचलित कठपुतली परंपरा एकाग्र प्रदर्शन एवं व्याख्यान आधारित पुतुल समारोह में विलास जानवे, उदयपुर का पारंपरिक और आधुनिक पुतली कला पर व्याख्यान एवं दिलीप मासूम, भोपाल द्वारा धागा पुतली शैली में लोककथा एकाग्र प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति की शुरुआत जानवे के व्याख्यान से हुई, उन्होंने अपने गुरु स्व. अजय पॉल और स्व. पद्मश्री देवीलाल सामर का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे देश के कई राज्यों में पुतली कला की प्राचीन परंपरा रही है, जहां धागा, छड़, छाया और दस्ताना पुतली देखने को मिलती है। श्री जानवे ने कहा कि कलाकार को जमाने में आये बदलाव के हिसाब से खुद को भी बदलना पड़ेगा। दर्शक को बांधे रखने में पुतली कला की विलक्षणता कारगर होती है, लेकिन उस खासियत को बनाए रखना बड़ा चुनौतिपूर्ण होता है। श्री जानवे एक कलाकार और कलाओं के जानकार हैं। उनका लंबा और गहरा अनुभव देश के कलाकारों के साथ रहा है। विलास जानवे को देश की कलाओं और कलाकारों की गहरी जानकारी भी है और वे स्वयं रंगमंच और माइम के कुशल कलाकार हैं। विलास जानवे का सबसे महत्वपूर्ण कार्य देश के बहरूपिया कलाकारों को संयोजित करके एक मंच प्रदान करना रहा है और यह कार्य उन्होंने उदयपुर से लेकर दिल्ली तक किया है।

हो जी रे दीवाना, हो जी रे मस्ताना…

दूसरी प्रस्तुति दिलीप मासूम द्वारा धागा पुतली शैली में बाबा रामदेव महाराज की लोककथा थी, जिसमें नौकोटी मारवाड़ के राजा अजमल की कथा को कठपुतली के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शन के मध्य कुछ राजस्थानी गीत- हो जी रे दीवाना, हो जी रे मस्ताना…, पल्लो लटके…, चला-चला रे ड्राइवर गाड़ी होले-होले…, बनी का मोरिया रे जट चौमासो लागे रे… आदि को समाहित किया गया। श्री भाट का यह खानदानी पेशा है, कठपुतली कला इन्होंने अपने पिता स्व. चमनलाल भाट से सीखी और विगत 35 वर्षों से इस कला का प्रदर्शन करते आ रहे हैं। मंच पर गायन में दिलीप मासूम भाट, सह गायन में सुश्री हेमलता, कोरस विनोद, पुतुल संचालन श्याम भाट, दानिश, ढोलक पर संतोष भाट ने संगत दी। कथा वाचन श्यामदास वैरागी का था।

गमक में आज

सोमवार को शाम 6ः30 बजे से पुतली कला की विविधता पर व्याख्यान तथा विभाष कुमार उपाध्याय, भिलाई द्वारा धागा पुतली शैली में पंचतंत्र की कथा एकाग्र प्रस्तुति होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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