Home राजधानी न्यूज़ Bhopal News: विवाह और मतदान में परिपक्वता का पैमाना अलग क्यों

Bhopal News: विवाह और मतदान में परिपक्वता का पैमाना अलग क्यों

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Publish Date: | Mon, 23 Nov 2020 11:01 PM (IST)

संगोष्ठीः बालिका विवाह 18 या 21 वर्ष, महिलाओं में मतभेद

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। जीएसटी कमिश्नर रक्षा दुबे चौबे कहती हैं बालिकाओं के विवाह की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 किया जाना उचित नही है, क्योंकि परिपक्वता का सवाल मतदान के अधिकार को निर्धारित करते समय 18 साल को उचित मानता है, तब निजी मामले में यही पैमाना कैसे अपरिपक्व हो सकता है। बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव सुखप्रीत कौर का मत है कि विवाह की उम्र समानता और बेहतर शिक्षा के मद्देनजर 18 से बढ़कर 21 होनी ही चाहिए, क्योंकि जब 21 साल तक देश की बेटियां पढ़ेंगी तब एक नए भारत का आविर्भाव होगा। इन जोरदार तर्कों और दावों के साथ सोमवार को ‘क्या बालिकाओं की शादी की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए’ विषयक इ-संगोष्ठी हुई। चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 21वीं संगोष्ठी में इस बार विभिन्न क्षेत्रों की 15 प्रतिष्ठित महिला वक्ताओं ने भागीदारी की। भोपाल की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.शशि ठाकुर का कहना था कि 18 से 21वर्ष विवाह की आयु सीमा बढ़ाने से लड़कियों में शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा। इससे विवाह मामलों का लिंगभेद भी खत्म होगा। डॉ. ठाकुर ने मेडिकल साइंस के विभिन्न पैरामीटर्स के आधार पर 21 वर्षीय विवाह कानून की वकालत की।

इस विषय पर फिर होगा विचार-विमर्श

भक्ति शर्मा ने 21 वर्षीय विवाह प्रस्ताव को उचित नहीं माना और कहाकि आज का सामाजिक और पारिवारिक माहौल एक तरह की खुली संस्कृति को पोषित कर रहा है, जिसके चलते प्यूबर्टी विकास जल्द हो रहा है, ऐसे में 21 साल तक हर तबके की बेटियों का विवाह रोके रखना व्यवहारिक नहीं है। अभियोजन अधिकारी मनीषा पटेल ने अपने दैनंदिन अनुभव के आधार पर कहा कि अगर बलिका के विवाह की आयु 21 साल तय की जाती है तो यह कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती साबित होगा, क्योंकि इसके माध्यम से पॉक्सो केसों की संख्या बढ़ेगी। लोग इसका दुरुपयोग करेंगे। संगोष्ठी में जेजेबी मेंबर प्रतिभा पांडे सहित अन्य महिलाओं ने अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में मत मतांतर की तर्कपूर्ण स्थिति के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि फाउंडेशन इस विषय पर अगली इ-संगोष्ठी में फिर से विचार विमर्श करेगा। फाउंडेशन के सचिव डॉ.कृपाशंकर चौबे ने बताया कि अगले सेमिनार इस विषय पर न्यायपालिका,पुलिस और कानूनविदों को जोड़ा जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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