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Female patwari lost balance due to sharp horn, collided with bike and fell on the road, the tanker from behind crushed | तेज हॉर्न से महिला पटवारी का संतुलन बिगड़ा, बाइक से टकराकर सड़क पर गिरी, पीछे से आए टैंकर ने कुचला

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शिवपुरीएक घंटा पहले

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पटवारी ऋतु गुप्ता (फाइल फोटो)

  • अमरौदी गांव के पचीपुरा के पास हुआ हादसा

पोहरी-मोहना रोड पर अमरौदी गांव के पास पचीपुर पर टैंकर ने स्कूटी सवार महिला पटवारी को कुचल दिया। पहिया सिर के ऊपर से निकल जाने से महिला पटवारी की घटना स्थल पर ही जान चली गई। अचानक पीछे आए टैंकर चालक ने हार्न बजाया। तेज हॉर्न की आवाज सुनकर महिला पटवारी घबरा गईं और हड़बड़ी में स्कूटी बायीं की बजाय दायीं साइड मोड़ दी। स्कूटी सामने से आ रही बाइक से टकरा गई और पटवारी सड़क पर गिर गई। पीछे से टैंकर ने कुचल दिया। पुलिस ने टैंकर जब्त कर चालक को पकड़ लिया है।

जानकारी के मुताबिक पटवारी ऋतु गुप्ता (27) पुत्री मदनलाल गुप्ता निवासी कटरा मौहल्ला पोहरी बुधवार की सुबह 10 बजे स्कूटी से अपने हल्का खरई डाबर के लिए निकलीं। पोहरी से 20 किमी दूर अमरौदी गांव के पचीपुरा के पास स्कूटी सामने से आ रही बाइक से टकरा गई और पीछे से आ रहे टैंकर ने उसे कुचल दिया। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि पीछे से आ रहे टैंकर चालक ने हार्न बजाया।

अचानक तेज हॉर्न सुनकर ऋतु गुप्ता घबरा गईं और हड़बड़ी में स्कूटी बायीं की जगह दायीं तरफ मोड़ दी। स्कूटी सामने आ रही बाइक से टकरा गई और बाइक सवार सड़क से नीचे गिर गया। जबकि पटवारी स्कूटी सहित बीच सड़क पर आ गिरी। इसी बीच तेज रफ्तार टैंकर के पहिए से पटवारी का सिर कुचल गया और उसकी मौके पर ही जान चली गई।

पटवारी पद पर चयन के बाद दो साल पहले ही पदस्थी हुई थी: परिवार में ऋतु गुप्ता व एक छोटा भाई है। पटवरी बनने से पहले ऋतु गुप्ता अपने पिता के संग ग्वालियर रहती थी। पटवारी पद के लिए चयन हुआ और ट्रेनिंग के बाद दो साल पहले ही बैराड़ तहसील के खरई डाबर हल्के में पदस्थी हुई थी।

स्कूटी से जाने पर पिता टोकते थे, हल्का दूर था इसलिए मजबूरी थी
बताया जा रहा है कि पटवारी ने चार महीने पहले ही स्कूटी चलाना सीखी थी। स्कूटी चलाते वक्त ऋतु अक्सर लड़खड़ा जाती थीं। पूरी तरह गाड़ी चलाना नहीं आने के बावजूद अपने हल्के में स्कूटी से पांच छह बार जा चुकी थीं। बुधवार को भी पिता ने स्कूटी से खरई डाबर जाने से टोका भी थी। लेकिन गांव दूर होने से परेशानी होती थी इसलिए स्कूटी से जाना पड़ा। यदि स्कूटी चलाते वक्त हेलमेट भी पहना होता तो ऋतु की जान बच सकती थी।

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