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Gandhi Jayanti Special Passion to save Gandhiji memories painted on postage stamps and coins

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Updated: | Thu, 01 Oct 2020 07:29 PM (IST)

Gandhi Jayanti Special: अमित भटोरे व युवराज गुप्ता खरगोन, बुरहानपुर । नईदुनिया। राष्ट्रप‍िता महात्मा गांधी हर भारतीय की स्मृति में बसते हैं लेकिन कई लोगों में उन स्मृतियों को भौतिक रूप में भी सहेजने का जुनून है। मालवा-निमाड़ अंचल के खरगोन और बुरहानपुर में भी ऐसे कई लोग हैं।

खरगोन के दो युवाओं ने रियासतकाल से ब्रिटिशकाल तक की एंटिक वस्तुओं का संग्रह किया है। इनमें सबसे खास राष्ट्रपिता की स्मृतियों पर केंद्रित चीजें हैं। बड़वाह के 30 वर्षीय एडवोकेट ऋषिराज उपाध्याय के पास करीब 12 हजार डाक टिकटों का संग्रह हैं। इसमें गांधीजी के बचपन से लेकर मृत्यु तक और उसके बाद के आयोजनों पर केंद्रित डाक टिकट भी हैं। डाक टिकटों के इसी संग्रह के माध्यम से उन्होंने गांधीजी की जीवन यात्रा भी प्रदर्शित की है।

गांधीजी के हस्ताक्षर वाला सिक्का भी है

खरगोन शहर के 40 वर्षीय मिलन महाजन पिछले 10 वर्षों से विभिन्ना देशों की मुद्राओं और सिक्कों का संग्रहण कर रहे हैं। उनके पास गांधीजी का स्मारक सिक्का भी है, इसमें उनके हस्ताक्षर भी हैं। कस्तूरबा आश्रम अहमदाबाद से जुड़े 20 पोस्टकार्ड के अलावा गांधीजी की फोटो वाले 25 अनूठे नोट भी उन्होंने सहेजे हैं। गांधीजी की जन्मतिथि के नंबर वाला नोट भी उनके संग्रह में है। महाजन के पास 180 देशों की मुद्राओं का संग्रह है।

इसी तरह, ऋषिराज के पास वर्ष 1948 में गांधीजी पर छपा डाक टिकट है जिसका उपयोग गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने किया था। ये डाक टिकट स्विट्जरलैंड से छपवाकर मंगाए गए थे। ऋषिराज के पास गांधीजी के हस्ताक्षर भी हैं।

इसी तरह, बुरहानपुर में गांधीवादी विचारक वरिष्ठ समाजसेवी चंद्रकांत पाटीदार एवं प्रकाशचंद्र लाड ने कोरोनाकाल में गांधीजी से जुड़ी स्मृतियों की ऑनलाइन प्रदर्शनी भी लगाई थी। पाटीदार के पास 51 हजार से अधिक अनूठे डाक टिकटों का संग्रह है जिनमें गांधीजी से जुड़े भी कई डाक टिकट हैं। देश की आजादी की पहली वर्षगांठ 15 अगस्त 1948 को भारतीय डाक तार विभाग ने गांधीजी पर चार डाक टिकट का प्रथम दिवस आवरण जारी किया था। जिस पर महात्मा गांधी के दो टिकट डेढ़ आना व साढ़े तीन आना मूल्य के थे। वह भी इस संग्रह में है।

खादी के कपड़े पर बना सबसे महंगा व आकर्षक डाक टिकट और लिफाफा भी सहेजकर रखा गया है। इसका मूल्य 250 रुपये है। भारतीय डाक विभाग ने यह ऐतिहासिक डाक टिकट सबसे महंगी मूल्य दर का एक ही बार निकाला था। वहीं दस रुपये से लेकर 100 रुपये तक के अन्य टिकटों का संग्रह है। पाटीदार बताते हैं कि महात्मा गांधीआठ दिसंबर,1933 में बुरहानपुर आए थे। उस समय के श्वेत-श्याम फोटो भी सहेजे गए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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