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Madhya Pradesh Police Thousands of posts in police department are vacant investigation work is affected

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Publish Date: | Sun, 29 Nov 2020 08:16 PM (IST)

Madhya Pradesh Police: मोहम्मद रफीक, भोपाल (नईदुनिया)। सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत‍ि में आरक्षण का मामला नहीं सुलझने का असर मध्य प्रदेश के पुलिस विभाग में काफी ज्यादा है। प्रधान आरक्षक, इंस्पेक्टर और डीएसपी स्तर पर हजारों पद खाली हैं। यही अमला मुख्य रूप से मैदान में होता है और जांच का काम भी मुख्यत: इन्हीं के जिम्मे होता है। पद रिक्त होने और अन्य व्यस्तताओं के कारण जांच का काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, सीधी भर्ती वाले आइपीएस जैसे पदों पर संख्या लगभग सामान्य है। इससे हालात यह हैं कि निगरानी तंत्र तो पर्याप्त है, लेकिन मैदानी अमले की कमी से निचले स्तर पर तनाव बढ़ रहा है।

दरअसल, आरक्षक पद पर सीधी भर्ती होती है, लेकिन प्रधान आरक्षक का पद पदोन्नत‍ि वाला है। इसी तरह सब इंस्पेक्टर पद पर सीधी भर्ती के बाद इंस्पेक्टर का पद पदोन्नत‍ि वाला है। डीएसपी के पद के लिए भी पदोन्नत‍ि का प्रविधान है। प्रधान आरक्षक से जांच अधिकारी की भूमिका शुरू हो जाती है और अधिकांश व अलग-अलग मामलों में इन्हीं पदोन्नत‍ि वाले पदों के इर्द-गिर्द रहती है।

पदोन्नत‍ि में आरक्षण का मामला लंबित होने के कारण इन पदों पर पदोन्नत‍ि नहीं दी जा रही है। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाले इन कर्मचारियों-अधिकारियों को कानून-व्यवस्था की स्थिति भी संभालनी होती है। ऐसे में जांच के लिए समय निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। उधर, आइपीएस कैडर का मामला इससे अलग होने के कारण वहां अधिकारियों की संख्या को लेकर ज्यादा समस्या नहीं है। आइपीएस के सृजित पद 305 हैं तो उनकी संख्या 263 है, जबकि पदोन्नत‍ि वाले पदों पर हजारों तक की संख्या खाली है।

पदोन्नत‍ि वाले लगभग इतने पद खाली

प्रधान आरक्षक 5000

सहायक उप निरीक्षक 4500

उप निरीक्षक 850

निरीक्षक 700

डीएसपी 300

यह हो रहा असर

– मैदानी अमले का काम का बोझ बढ़ा है।

– महत्वपूर्ण मामलों की जांच में भी देरी होती है।

– लगातार ड्यूटी से कर्मचारियों में तनाव बढ़ा है।

– कम समय में अधिक जांच के दबाव से जांच कार्य प्रभावित होने की आशंका।

एक्सपर्ट व्यू

वेतन यथावत रखने का भरोसा दे सरकार

सरकार को जनता की सुविधाओं को देखते हुए फैसला लेना चाहिए। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया जा सकता है कि फिलहाल पदोन्नत‍ि को मंजूरी दी जाए। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उसे वैसा ही लागू किया जाएगा। पदोन्नत‍ि के साथ वेतन की बढ़ोतरी की जाए और यह भरोसा दिलाया जाए कि कोर्ट का फैसला पक्ष में नहीं आने के बाद भी कर्मचारियों का वेतन यथावत रखा जाएगा तो कर्मचारी भी इस पर सहमत हो सकते हैं।

पंकज दुबे, एडवोकेट, मप्र हाई कोर्ट

सरकार की ओर से अधिनस्थों की पदोन्नत‍ि का रास्ता निकालने के लिए प्रयास जारी हैं।

अन्वेष मंगलम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन)

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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