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National Voluntary Blood Donation Day 2020 Seeing the need donated blood for the first time

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Updated: | Thu, 01 Oct 2020 05:45 AM (IST)

National Voluntary Blood Donation Day 2020: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक अक्टूबर को स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। शहर में इस समय ऐसी कई संस्थाएं और लोग हैं, जो जरूरतमंद लोगों को अपना रक्त देकर उनका जीवन बचा रहे हैं। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने 100 से अधिक बार रक्तदान किया है। पहली बार रक्तदान करने के बाद मनोस्थिति बदली और उन्होंने काम को लगातार जारी रखने का संकल्प लिया जो अब-भी जारी है।

बुजुर्ग का जीवन बचाने के बाद लिया संकल्प

सूर्यदेव नगर में रहने वाले दीपक नाइक अब तक 117 बार रक्तदान कर चुके हैं। 19 साल की उम्र में महू में अपने एक परिचित को रक्त दिया था। गंभीर स्थिति में होने के बाद भी उनका जीवन बच गया। तब से दीपक ने रक्तदान करने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने घर को ही रक्तदान करने के लिए प्रेरणादाई रूप से बदल दिया है। अपने स्कूटर, कार सहित घर के गमलों में भी रक्तदान से संबंधित स्लोगन लिखे हैं। यहां तक की विवाह पत्रिकाओं तक में रक्तदान की अपील प्राथमिकता से करते हैं।

पहली बार 1976 में किया था रक्तदान

शहर के भूपेंद्र सिंह डंग 105 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने 1976 में ग्वालटोली में लगाए एक रक्तदान शिविर में पहली बार रक्तदान किया। वहां पर जब उन्हें जानकारी मिली कि रक्त नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की मौत भी हो जाती है। तब से ही उन्होंने रक्तदान करने का निर्णय लिया जो लगातार जारी है।

पहली बार एनसीसी शिविर में दिया था रक्त

दो साल पहले मुंबई से इंदौर में आकर बसे डेविड मेंडोंस अब तक 295 बार एसडीपी और रक्तदान कर चुके हैं। 19 साल की उम्र में पहली बार उन्होंने एनसीसी शिविर में रक्तदान किया था। उस समय इकट्ठा किया गया रक्त जरूरतमंद लोगों को अस्पताल में पहुंचाया गया। इससे डेविड प्रेरित हुए और उन्होंने लगातार इस काम को जारी रखा। वह 2018 से इंदौर में है और यहां पर एमवाय सहित अन्य अस्पतालों में भी जरूरत पड़ने पर रक्तदान करने पहुंच जाते हैं।

परेशानी हुई तो समझा दर्द

शहर के प्रकाश रोचलानी जब 18 साल के थे तब उनके पिता की तबीयत खराब हुई। उस समय बी-निगेटिव रक्त मिलने में बहुत दिक्कत आई। उन्होंने अपना रक्त समूह जांच करवाया तो वह भी निगेटिव मिला। पिता को रक्त मिलने में हुई परेशानी को जाना और फिर दूसरों को दिक्कत न हो इसलिए इसे जारी रखा। बुधवार को ही उन्होंने 111वीं बार रक्तदान किया।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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